रूबी की माँ काफी परेशान है, उसका मन भारी-भारी
है, चिंता से उसके चेहरे पर जो रेखाऎं उभर आईं हैं वे काफी गहरी दीख रहीं है. वह उस खतरे के बारे में ज्यादा
नहीं सोचना चाहती, पर मन है कि बार-बार वहीं जाकर अटक जाता है. अन्दर ही अन्दर एक
लहर-सी उठती है और वह काँपने लगती है, घबराहट के मारे चेहरे पर पसीने की बूँदें
जमा हो गईं हैं, फिर भी वह संयत बनाये रखी है. वह नहीं चाहती कि रूबी उसके इस
स्थिति को समझे क्योंकि यदि वह कमजोर पड़ गई तो सबकुछ बिखर जायेगा. इसलिए वह भय के
भाव को प्रकट नहीं होने देना चाहती. उसके सामने आने से पूर्व वह चेहरे को अच्छी
तरह साफ कर लेती है. आइना में मुखरा इधर-उधर घुमाकर वह परख लेती है और फिर बनावटी मुस्कान के साथ अवतरित
होती है.