एक थी यमुना। वह बहुत प्यारी थी, ममता की मूरत थी, दादी-नानी की लाडली थी। कई किस्से-कहानियाँ उसके बारे में प्रचलित थीं। गाँव-गाँव में सदियों से उसकी महानता के बारे में कहा सुना गया था। वह जीवनदायनी थी। देवी थी। वह देवी गंगा की जुडुआ बहन थी। लोग उसे माँ समझते थे, पर वह एक नदी थी। हजारों गाँवों को सींचने-सवाँरने वाली, लाखों-करोडों लोगों को सदियों से पालने-पोसने वाली, वास्तव में वह मानव सभ्यता की जननी थी। मनुष्य ने जब पहला कदम उसके गोद में रखा तो उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे वह अपनी माँ के आँचल की छाँव में आ गया हो। वही जुडाव जो अपनी माँ से होता है लोगों ने महसूस किया था। लोग उसकी शरण में सुरक्षित रहते थे।
Friday, 10 February 2017
एक थी यमुना
एक थी यमुना। वह बहुत प्यारी थी, ममता की मूरत थी, दादी-नानी की लाडली थी। कई किस्से-कहानियाँ उसके बारे में प्रचलित थीं। गाँव-गाँव में सदियों से उसकी महानता के बारे में कहा सुना गया था। वह जीवनदायनी थी। देवी थी। वह देवी गंगा की जुडुआ बहन थी। लोग उसे माँ समझते थे, पर वह एक नदी थी। हजारों गाँवों को सींचने-सवाँरने वाली, लाखों-करोडों लोगों को सदियों से पालने-पोसने वाली, वास्तव में वह मानव सभ्यता की जननी थी। मनुष्य ने जब पहला कदम उसके गोद में रखा तो उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे वह अपनी माँ के आँचल की छाँव में आ गया हो। वही जुडाव जो अपनी माँ से होता है लोगों ने महसूस किया था। लोग उसकी शरण में सुरक्षित रहते थे।
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